Saturday, September 25th, 2021

हिंदी की पटरी पर उतर रही इंजीनियरिंग की शिक्षा

 वाराणसी

आमतौर पर नए आविष्कारों के लिए जूझने वाले आईआईटी बीएचयू के विशेषज्ञ शिक्षक इन दिनों एक नई चुनौती पर काम कर रहे हैं। यह चुनौती है आईआईटी बीएचयू को मातृभाषा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की। इंजीनियरिंग की शिक्षा हिंदी माध्यम में कराने की। आईआईटी में इसपर काम शुरू हो चुका है। निदेशक प्रो. पीके जैन का कहना है कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप अगले शैक्षणिक सत्र से हिंदी चुनने वाले छात्रों को इसी माध्यम में तकनीकी शिक्षा मुहैया कराई जाएगी।

कोर्स के हिंदीकरण के काम में भी आईआईटी ने वैज्ञानिक प्रणाली अपनाई है। तकनीकी शब्दों को हिंदी में अनुवाद करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। विभागों की तरफ से प्रस्तावित शब्दों को कमेटी पारित करेगी। इसके बाद इन्हें राष्ट्रीय भाषा शब्दावली प्रकोष्ठ के समक्ष रखा जाएगा। प्रकोष्ठ की मुहर लगने के बाद इन तकनीकी शब्दों को कोर्स में शामिल किया जाएगा ताकि यह सर्वमान्य रहें। संस्थान में जल्द ही भाषा शब्दावली प्रकोष्ठ की कार्यशाला भी कराने की तैयारी है। बीएचयू आईआईटी के लिए भैषजकीय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी (फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) विभागाध्यक्ष प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव इस अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लैब मैनुअल (लैब में प्रयोग करने की नियमावली) के साथ ही कोर्स तक हिंदी भाषा में बदले जा रहे हैं।
किसी भी भाषा का आसानी से समझ में आना पहली जरूरी शर्त होती है। आईआईटी में अंग्रेजी के तकनीकी शब्दों को हिंदी में परिवर्तित करते समय इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि यह कठिन न हों। कठिन शब्दों के स्थान पर अंग्रेजी के शब्दों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही अन्य भाषाओं से भी शब्द लेने की तैयारी है। निदेशक बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि आईआईटी बीएचयू में हिंदी इस्तेमाल में नहीं है। संस्थान से प्रकाशित होने वाले न्यूजलेटर हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रकाशित किए जाते हैं। 

Source : Agency

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