Friday, March 5th, 2021

रथ आरोग्य सप्तमी आज, पूजा विधि और महत्व

नई दिल्ली
माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ आरोग्य सप्तमी मनाई जाती है। यह ब्रह्मांड में ऊर्जा के एकमात्र स्रोत भगवान सूर्य के जन्म का दिन होता है। इसी दिन से भगवान सूर्य अपने साथ घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर विचरण प्रारंभ करते हैं। इसे रथ आरोग्य सप्तमी कहा जाता है। सूर्य संपूर्ण ब्रह्मांड का न केवल ऊर्जा स्रोत है बल्कि यह स्वस्थ जीवन प्रदान करने वाले प्रत्यक्ष देवता है। ज्योतिष में भी सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है और जन्मकुंडली में सूर्य की प्रबलता जातक को उच्च पद, सम्मान, प्रतिष्ठा दिलवाती है। रथ आरोग्य सप्तमी 19 फरवरी 2021 शुक्रवार को आ रही है। इसे संतान सप्तमी भी कहा जाता है। उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
 
यह व्रत करने के लिए व्रती सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करे। सूर्योदय के समय तांबे के कलश से सूर्यदेव को 12 बार जल का अ‌र्घ्य दें। जल में लाल गुड़हल का पुष्प भी डालें या लाल चंदन डालें। अ‌र्घ्य देते समय सूर्य के 12 नामों का उच्चारण करें। यदि 12 नाम याद न हों तो ऊं सूर्याय नम: या ऊं घृणि: सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते रहें। जल की गिरती धारा के मध्य से सूर्यदेव को देखने का प्रयास करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली सजाएं। पूजा स्थान में सूर्यदेव का सात घोड़ों वाले रथ पर सवार चित्र दीवार पर चिपकाकर पूजन करें। धूप, दीप, नैवेद्य सहित पूजन करें। आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। सूर्यदेव से आयु, आरोग्य, पद-प्रतिष्ठा की कामना करें। इस दिन दिनभर व्रत रखते हुए एक समय सूर्यास्त के बाद भोजन किया जाता है। इस दिन भोजन में नमक का प्रयोग नहीं किया जाता है।
 
जिन लोगों की जन्मकुंडली में सूर्य नीच राशि का हो, कमजोर हो, शत्रु क्षेत्री हो।
नेत्र रोगी, मस्तिष्क रोगियों, त्वचा रोगियों को यह व्रत रखकर इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

रथ सप्तमी व्रत करने से पुराने और जीर्ण रोगों से मुक्ति मिलती है।
नि:संतान दंपती या जिनकी संतान हमेशा बीमार रहती है, वे दंपती यह व्रत करें।


पद-प्रतिष्ठा, सम्मान और नौकरी में उच्च पद प्राप्त करने के लिए।
शिक्षा में रूकावट आ रही है तो यह व्रत करें।
रथ सप्तमी व्रत करने से भाग्य प्रबल होता है। आध्यात्मिक उन्नति होती है।
प्रशासनिक सेवा, सरकारी क्षेत्रों से जुड़े लोगों को यह व्रत करना चाहिए।
जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण दोष होने पर यह व्रत करें।
इस दिन घर में सूर्य ब्रह्मास्त्र स्थापित करने से वास्तु दोष दूर होते हैं।

Source : Agency

आपकी राय

11 + 12 =

पाठको की राय